mulana Mazahir ali sb.ki yaad me
आलि जनाब मौलाना मज़ाहिर अली ज़ैदी — वो सूरज जिसकी रौशनी कभी मद्धम नहीं पड़ती ✨ अगर इल्म को एक चेहरा दिया जाए, तो वो चेहरा आलि जनाब मौलाना मज़ाहिर अली ज़ैदी (लिसानुल वाइज़ीन) का होगा। अगर इंसानियत को एक आवाज़ दी जाए, तो वो आवाज़ उन्हीं की होगी। वो शख्सियत जिनका ज़िक्र करना सूरज को रौशनी दिखाने जैसा है — क्योंकि उन्होंने जो रौशनी फैलाई, वो आज भी दिलों को जगमगा रही है। सन 80 का दौर, जब न साधन थे, न सुविधाएँ… जब ज्ञान की राह धूल और मुश्किलों से भरी थी — तब एक सच्चे रहनुमा ने इल्म का दीपक जलाया — “जामे-ए-महदिया” के नाम से। वो दीपक नहीं, बल्कि इल्म का चिराग़ था, जिसने न जाने कितने दिलों और ज़ेहनों में रोशनी भर दी। आज वो दीया एक संस्थान, एक मिशन, एक तहज़ीब बन चुका है — जो क़यामत तक चमकता रहेगा, क्योंकि उसे ख़ुलूस और नीयत की रौशनी से जलाया गया था। मौलाना मज़ाहिर अली ज़ैदी सिर्फ़ एक आलिम नहीं थे, बल्कि इल्म और इंसानियत का संगम थे। उनकी ज़ुबान पर हिकमत थी, उनके दिल में रहमत थी, और उनके अमल में खालिस इंसानियत। उन्होंने न सिर्फ़ इल्म बाँटा, बल्कि रूहों को जगाया। कितने गरीब बच्चों को उन...